बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

सबसे खूबसूरत पल को क्रिकेट के लिए कैसे किया कुर्बान पूर्व कप्तान ने ?

हम बात करेंगे आज एक ऐसे कप्तान के बारे में जिन्होंने अपने पहले ओडीआई मैच की कप्तानी में विश्व की सबसे बेहतरीन टीम ऑस्ट्रेलिया को मात दी.इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.उसके बाद क्रिकेट के प्रति अपने समर्पण और मजबूत इच्छाशक्ति से उन्होंने करोड़ों दिलों पर राज किया.इस दौरान उन्होंने अपने सीनियर और जूनियर खिलाडियों के साथ ऐसा तालमेल बिठाया की.संन्यास लेने के बाद भी भारतीय क्रिकेटर उन्हें याद करते हैं. 


अपने पहले मैच में मनवाया कप्तानी का जलवा :-जैसा की आप सभी को मालूम है की महेंद्र सिंह धोनी उस समय भारतीय टीम के कप्तान बनाये गए.जब क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप अर्थात 2007 टी-20 वर्ल्ड कप में एक युवा टीम के साथ साऊथ अफ्रीका रवाना हुए.भारतीय टीम के सीनियर खिलाड़ी अर्थात सचिन तेंदुलकर,राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली ने अपना नाम वापिस ले लिया.बस यही से शुरू हुआ भारत के सबसे सफल कप्तान का सफर.सबसे पहले 2007 टी-20 वर्ल्ड कप,2011 ओडीआई विश्व कप और 2013 की चैंपियन ट्रॉफी जीतने के साथ ही महेंद्र सिंह धोनी विश्व के ऐसे पहले कप्तान बन गए.जिनके पास आईसीसी की तीनो ट्रॉफी है.पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने अपना पहला टी-20 मैच खेला.


 क्रिकेट को रखा सर्वप्रथम :-महेंद्र सिंह धोनी के अंदर जिस प्रकार का क्रिकेट के प्रति जूनून विद्यमान था.वो देखते ही बनता है.बात है 2015 विश्व कप की.जब धोनी भारतीय टीम के कप्तान थे.इसी दौरान उनके घर लक्ष्मी का जन्म हुआ.क्रिकेट में अपना ध्यान अच्छे से लगा रहने के कारण धोनी ज्यादा फ़ोन भी नहीं रखते थे.उनकी पत्नी को पुत्री हुयी.इस बात की जानकारी उन्हें अपने हमवतन साथी और सबसे अच्छे दोस्त रैना से मिली.किसी भी पिता के लिए सबसे बड़ा पल होता है.इस खबर को सुनकर कप्तान काफी खुश थे लेकिन वो वर्ल्डकप छोड़कर भारत नही आये.इस बात का खुलासा उन्होंने एक साक्षात्कार में किया था.उन्होंने कहा की मेरे लिए देश सबसे ज्यादा जरूरी है.  


पॉलीक्रिक के अनुसार 'धोनी का क्रिकेट के प्रति समर्पण जगजाहिर है.इस बात के साक्षी बीसीसीआई के साथ-साथ उनके साथी खिलाड़ी भी रहे.'जिस निडरता और जज्बे के साथ उन्होंने भारतीय टीम का नेतृत्व किया.इस दौरान उन्होंने भारत को कई यादगार पल भी दिए.  

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